शहरों का विकास राज्य के विकास का पर्याय है, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे- सचिव शंगीता आर

रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर. ने विभागीय अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, नोडल अधिकारियों एवं प्रदेश के सभी 194 नगरीय निकायों के अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक लेकर सुशासन, जवाबदेही, जन सेवा एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। पहली बार प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों का पूरा अमला एक साथ इस बैठक में शामिल हुए।

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव शंगीता आर. ने बैठक में कहा कि नगरीय निकाय राज्य शासन का चेहरा होते हैं और नगरों का विकास राज्य के विकास का पर्याय है। नागरिकों को शुद्ध पेयजल, स्वच्छ वातावरण, बेहतर मूलभूत सुविधाएं एवं कचरामुक्त शहर उपलब्ध कराना नगरीय निकायों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन के पास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, इसलिए कार्यों में लापरवाही, अनियमितता या अनावश्यक बहाने स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

सचिव ने सभी अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक आयुक्त एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी अपने निकाय की समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करें। स्थानीय समस्याओं की पहचान कर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की मेहनत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए और हर निकाय में परिणाम दिखाई देना चाहिए।

सचिव शंगीता आर. ने अधिकारियों के लिए “थंब-रूल” निर्धारित करते हुए कहा कि महापौर, अध्यक्ष एवं जनप्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी परिस्थिति में जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार या अभद्र भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को नियमों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से कार्य करने का पूरा अधिकार है, लेकिन जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ बेहतर व्यवहार बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले अधिकारियों और निकायों को सम्मान मिलेगा, जबकि लापरवाही या गलत कार्य करते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी नियमों के अनुरूप सही कार्य कर रहा है तो विभाग हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहेगा।

बैठक में सचिव ने नवनियुक्त नोडल अधिकारियों को मार्गदर्शक की भूमिका निभाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नोडल अधिकारी नियमित रूप से नगरीय निकायों का निरीक्षण करेंगे, योजनाओं की समीक्षा करेंगे तथा समन्वय के साथ निकायों को सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही निकाय स्तर पर भी अधिकारियों को वार्डवार जिम्मेदारी देने के निर्देश दिए गए, ताकि कार्यों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक सप्ताह संभागवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की जाएगी तथा प्रत्येक माह विभागीय समीक्षा बैठक लेकर विकास कार्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा।

सचिव शंगीता आर. ने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट केवल शासन-प्रशासन का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिकारी और नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। उन्होंने गीले एवं सूखे कचरे के पृथक्करण, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा बेहतर स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से नवीन अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का गंभीरता से अध्ययन कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग, भूजल संरक्षण एवं जल संरचनाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भवनों का निरीक्षण कर वर्षा जल संचयन की प्रभावी योजना बनाई जाए तथा पीएचई विभाग से समन्वय कर भूजल स्तर की नियमित जानकारी ली जाए।

उन्होंने हैंडपंप रिचार्ज, सोक-पिट निर्माण तथा जल संरक्षण के स्थानीय मॉडल विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को पेयजल के लिए परेशानी नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपील की।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा करते हुए सचिव श्रीमती शंगीता आर. ने कहा कि गरीब परिवार के लिए पक्का घर केवल भवन नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित जीवन का प्रतीक होता है। उन्होंने अधिकारियों को वार्डवार सर्वे कर पात्र हितग्राहियों की पहचान करने तथा आवास योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराया जाए। साथ ही जिन निकायों द्वारा अभी तक प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, उन्हें शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सचिव ने 15वें वित्त आयोग, पेयजल एवं स्वच्छता कार्यों तथा अन-टाइड फंड के उपयोग की समीक्षा करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रदान की गई राशि जनता की सुविधा और विकास के लिए है, इसलिए उसका जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी नगरीय निकायों को लंबित कार्यों की सूची प्रस्तुत कर विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा करते हुए सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि न्यायालय में प्रस्तुत जवाब तथ्यात्मक, मजबूत एवं समयबद्ध हों तथा न्यायालय के आदेशों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में सचिव शंगीता आर. ने आंगनबाड़ियों, स्वास्थ्य केंद्रों, पेंशन केंद्रों एवं मॉडल स्कूलों के उन्नयन पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक कल्याण एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।

बैठक में सूडा के सीईओ शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के उप सचिव भागवत जायसवाल, सूडा के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी दुष्यंत कुमार रायस्त, मुख्य अभियंता राजेश शर्मा, संयुक्त संचालक मिथिलेश अवस्थी, उप संचालक जितेंद्र कुशवाहा, उप संचालक अरुण साहू, उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील अग्रहरि, सचित साहू, अधीक्षण अभियंता रमेश सिंह और ओएसडी निशिकांत वर्मा भी मौजूद थे।

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