IAS ज्ञानेश कुमार होंगे देश के 26वें चुनाव आयुक्त, नौकरशाही में 37 साल से अधिक समय से है सक्रिय
देश के 26वें चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार नौकरशाही में 37 साल से अधिक समय से सक्रिय हैं। भारत के निर्वाचन आयोग की कमान संभालने से पहले ज्ञानेश कुमार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट बनाए जाने में भी अपना कौशल साबित कर चुके हैं। ज्ञानेश कुमार का अनुच्छेद 370 और राम मंदिर से कनेक्शन जानिए…
नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई बैठक में अगले मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार के नाम पर मुहर लगी है. अगले सीईसी के तौर पर नियुक्ति के लिए कानून मंत्रालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। तीन दशक से अधिक का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले ज्ञानेश कुमार भारत सरकार में कई शीर्ष पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। देश के निर्वाचन आयोग में नियुक्ति से पहले वरिष्ठ नौकरशाह ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में भी सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। बतौर आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार अपने 37 साल से अधिक के प्रभावशाली और उल्लेखनीय करियर में कई अहम कार्यों को निष्पादित कर चुके हैं। ज्ञानेश कुमार 2019 में भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले के समय गृह मंत्रालय में पदस्थापित थे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी, 2029 तक होगा। आइये जानते हैं इन्होंने कौनसी अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता की जन्म स्थली आगरा है। उनके पिता डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता और मां सत्यवती गुप्ता विजय नगर कॉलोनी में रहते हैं। पिता मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद से रिटायर हो चुके हैं। पिता के सरकारी नौकरी में होने की वजह से तबादला होते रहे और ज्ञानेश कुमार की शिक्षाहोने की वजह से शिक्षा गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर से हुई। ज्ञानेश के परिवार में ज्यादातर चिकित्सक हैं पर उन्होंने अलग रास्ता चुना।
ज्ञानेश कुमार बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। वाराणसी के क्वींस कॉलेज में वह टॉपर रहे। 12वीं उन्होंने लखनऊ के काल्विन तालुकेदार कॉलेज से की, यहां भी टॉप किया। इसके बाद आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली चले गए। वहां एक साल उन्होंने हुडको में भी काम कया। 1988 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और केरल कैडर के आईएसएस अधिकारी बन गए। पहली नियुक्ति उन्हें तिरुवनंतपुरम में बतौर डीएम मिली। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है।
यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2007 से 2012 तक वे रक्षा मंत्रालय में संयुक्त रक्षा सचिव रहे। 2014 में वे केरल सरकार के दिल्ली में रेजिडेंट कमिशनर थे। इस्लामिक स्टेट की हिंसक गतिविधियों के बीच उन्होंने 183 भारतीयों को इराक से निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें इरबिल में फंसी 46 मलयाली नर्स भी शामिल थीं।
खास बात यह है कि ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय के अलावा सहकारिता मंत्रालय में भी सेवाएं दे चुके हैं। दोनों मंत्रालय अमित शाह के पास हैं जो केंद्रीय मंत्रिमंडल में पीएम मोदी के बाद निर्विवाद रूप से नंबर दो माने जाते हैं। ऐसे में ज्ञानेश कुमार को शाह की निकटता हासिल थी। ज्ञानेश कुमार ने संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव के रूप में भी काम किया है। खास बात यह है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान वह रक्षा मंत्रालय में तैनात थे।
बता दें कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने करीब 6 साल पहले जम्मू-कश्मीर से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया था। संसद में विधेयक पारित कर जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटा गया और जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर में लागू संविधान के अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35ए के प्रावधान खत्म हो गए। अगस्त, 2019 का यह अहम घटनाक्रम इसलिए भी चर्चित है, क्योंकि संसद में विधेयक पेश करने से पहले इसकी खबर नहीं थी। गोपनीय तरीके से इस संवेदनशील फैसले को निष्पादित करने में ज्ञानेश कुमार ने अहम भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने और पूर्व राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने वाले विधेयक का मसौदा तैयार करते समय ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (कश्मीर संभाग) थे।
दशकों पुराने अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में रामलला को राम जन्मभूमि सौंपी और मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया। इसके बाद, 2020 में, ज्ञानेश कुमार को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया। उन्हें अयोध्या मामले से जुड़े सभी मामलों की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन भी शामिल था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद के सभी कार्य ज्ञानेश कुमार की देखरेख में हुए। अयोध्या मामले की देखरेख से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को ज्ञानेश कुमार ने सफलतापूर्वक निभाकर अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण दिया।
सीईसी नियुक्ति समिति की बैठक सोमवार की शाम हुई और नए सीईसी के नाम पर मुहर लगा दी गई। ज्ञानेश कुमार को वरिष्ठता के स्थापित परंपरा के अनुसार ही सीईसी बनाया गया है। नए सीईसी के रूप में ज्ञानेश कुमार इस साल नवंबर-दिसंबर में बिहार और 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल विधानसभा के चुनाव कराएंगे।



