इसरो ने राम सेतु के समुद्र के नीचे का डिजिटल मैप किया तैयार, नासा के सैटेलाइट का किया गया इस्तेमाल
एडम्स ब्रिज (राम सेतु) को लेकर हिंदुओं का खास धर्मिक महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार रामायण में हनुमान की वानर सेना ने इस पुल को भगवान राम को लंका पहुंचाने के लिए बनाया था…
नईदिल्ली (ए)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एडम्स ब्रिज, जिसे राम सेतु के नाम से भी जाना जाता है, का समुद्र के नीचे का डिजिटल मैप तैयार किया है.यह ब्रिज तमिलनाडु के रामेश्वरम या पम्बन द्वीप से लेकर श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच स्थित है. इसके मैप को तैयार करने के लिए अमेरिकी रिसर्च संस्थान नासा के सैटेलाइट का इस्तेमाल किया गया।
इस पुल के मानचित्र का काम इसरो के जोधपुर और हैदराबाद के रिसर्चर की ओर से नासा उपग्रह आईसीईसैट-2 का उपयोग करके किया गया. इसके उपयोग करके वैज्ञानिक बर्फ की चादरों, ग्लेशियरों, समुद्री बर्फ की ऊंचाई की सटीक जानकारी देता है।
रिसर्चर ने एडम्स ब्रिज (राम सेतु) का आयतन 1 वर्ग किमी आंका है, जिसमें से केवल 0.02 फीसदी ही औसत समुद्र तल से ऊपर पाया गया है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि चूंकि यह पुल पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है, इसलिए अब तक जहाज से आने वाले साउंडिंग डेटा के आधार पर सर्वे नहीं हो सकता था।
फारसी नाविकों ने इसे पहली बार 9वीं शताब्दी में सेतु बंधाई कहा था, जिसके अर्थ है समुद्र के पार का पुल. रामेश्वरम के मंदिरों के अभिलेखों से पता चलता है कि यह पुल 1480 तक समुद्र के ऊपर था. इसके बाद चक्रवात ने इसे नष्ट कर दिया।



