आज शिव योग में मनाया जा रहा नागपंचमी, जानिए मंत्र, शुभ मुहूर्त, कथा, आरती और पूजा विधि?

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी पर व्रत रखकर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय व जलाभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं…
नईदिल्ली (ए)। सावन मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग पूजा करने से कालसर्प दोष का अशुभ प्रभाव कम होता है। इस बार नाग पंचमी पर कई शुभ योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर व्रत रखकर रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय व जलाभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
नाग पंचमी पर बन रहे हैं शुभ संयोग
पंचांग के अनुसार सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 28 जुलाई को रात में 11 बजकर 25 मिनट पर होगा और 29 जुलाई मंगलवार को पंचमी तिथि रात में 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि का अनुसार, नाग पंचमी तिथि 29 जुलाई मंगलवार को ही मनाई जाएगी। इस बार नाग पंचमी तिथि पर शिव योग, रवि योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन सावन का मंगलवार होने के कारण इस बार नाग पंचमी पर मंगला गौरी व्रत का संयोग भी है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए जप तप का बहुत शुभ फल मिलता है।
नाग पंचमी पर्व का महत्व
पौराणिक मान्यताओं में नाग पंचमी पर्व का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से साधक और उसके परिवार की रक्षा होती है, समृद्धि आती है और सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित होता है। इस दिन नाग देवताओं को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से विभिन्न अनुष्ठान और परंपराएं निभाई जाती हैं।
भविष्य पुराण में आस्तिक मुनि द्वारा यज्ञ से नागों को बचाने की कथा है पुराण के अनुसार आस्तिक मुनि ने यज्ञ की आग में जलते हुए नागों पर दूध से अभिषेक किया था। इससे उन्हें शीतलता मिली और नागों ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि जो भी मनुष्य नाग पंचमी के दिन उनकी पूजा करेगा, उसे सर्प दंश का भय नहीं रहेगा।
कुंडली में ग्रहों की दशा को ठीक करने के उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत पंचमी तिथि के स्वामी सर्प हैं। कुंडली में राहु-केतु की स्थिति ठीक न हो तो नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा से लाभ पाया जा सकता है। कुंडली में अगर कालसर्प दोष हो तो ऐसे जातकों को इस दिन नाग पूजा करने से इस दोष से मुक्ति मिल जाती है। कालसर्प दोष कुंडली में तब आता है जब सारे ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं। इसके अतिरिक्त राहु-केतु की दशा,अन्तर्दशा या गोचरीय प्रभाव के कारण यदि जीवन में कोई समस्या या बाधा आ रही है तो नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने पर राहु-केतु के दोष का प्रभाव कम हो जाता है।
नाग पंचमी पर इन बातों का रखें ख्याल
नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध लावा चढ़ाना शुभ माना जाता है। नाग देवता को दूध पिलाना संभव न हो तो किसी शांत एकांत स्थान पर जाकर कटोरी में दूध और लावा रख आएं। नाग पंचमी पर भूलकर भी किसी सांप की हत्या न करें। अगर इस दिन सर्प दिख जाए तो इसे दूर से प्रणाम करके अपना रास्ता बदलकर कहीं और चले जाएं। लेकिन भूलकर भी सांप को परेशान न करें।नाग पंचमी के शुभ अवसर घर में या फिर मंदिर में रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है।नाग पंचमी के दिन भगवान शिव को नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं।
सूर्योदय का समय 29 जुलाई 2025 : सुबह में 5 बजकर 41 मिनट तक।
सूर्यास्त का समय 29 जुलाई 2025 : शाम में 7 बजकर 14 मिनट पर ।
आज का शुभ मुहूर्त 29 जुलाई 2025 :
ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 17 मिनट से 4 बजकर 59 मिनट तक। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 43 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। निशिथ काल मध्य रात्रि रात में 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक। गोधूलि बेला शाम में 7 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 35 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 29 जुलाई 2025 :
दोपहर में 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक राहुकाल रहेगा। दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। सुबह में 9 बजे 10 बजकर 30 तक यमगंड रहेगा। अमृत काल का समय सुबह में 12 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 9 मिनट तक। दुर्मुहूर्त काल सुबह में 8 बजकर 23 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक।
– नाग पंचमी की सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।
– ऊपर बताए गए किसी भी शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें। शुभ मुहूर्त में घर में किसी स्थान को साफ कर लें और यहां लकड़ी का एक पटिया रख दें।
– इस पटिए पर भगवान शिव का ध्यान करते हुए सोने, चांदी या तांबे से बनी नाग-नागिन के जोड़े की
प्रतिमा स्थापित करें और ये मंत्र बोलें-
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
– नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा का पहले गाय के दूध से अभिषेक करें, इसके बाद शुद्ध जल से। नाग देवता की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
– अब नाग प्रतिमा पर फूलों की माला अर्पित करें। एक-एक करके गंध, रोली, अबीर, गुलाल, चावल, फूल, नारियल आदि चीजें चढ़ाएं। इसके बाद दूध का भोग लगाएं।
– इस तरह पूजा करने के बाद नागदेवता की आरती करें। नाग पंचमी पर इस तरह पूजा करने से नागदेवता प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं।
भूमि का भार वहनकर्ता की।
उग्र रूप है तुम्हारा देवा,
भक्त सभी करते हैं सेवा।
मनोकामना पूर्ण करते,
तन-मन से जो सेवा करते।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।
भक्तों के संकट हारी की,
आरती कीजे श्री नाग देवता की।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।
महादेव के गले की शोभा,
ग्राम देवता में है पूजा।
श्वेत वर्ण है तुम्हारी ध्वजा,
दास ऊंकार पर रहती कृपा।
सहस्रफनधारी की,
आरती कीजे श्री नाग देवता की।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।



