नारी शक्ति वंदन अधिनियम: समावेशी लोकतंत्र की दिशा में ऐतिहासिक पहल – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम देश की मातृशक्ति को निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरगामी और महत्वपूर्ण कदम है, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को वास्तविक रूप देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसे में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भागीदारी को संस्थागत स्वरूप देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह पहल लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक प्रतिनिधिक, संतुलित और प्रभावी बनाएगी।

रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन एवं व्यापक जनजागरूकता को लेकर मंत्रिगण, जनप्रतिनिधियों एवं संगठन पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति महिलाओं की समान भागीदारी से ही संभव है और इस दिशा में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि वर्ष 2023 में इस अधिनियम को व्यापक समर्थन मिलना भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू होने की दिशा में यह पहल लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। ‘महतारी गौरव वर्ष’ और ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहलें इस दिशा में किए जा रहे ठोस प्रयासों का प्रमाण हैं, जिनसे लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कदम देश की महिलाओं और आने वाली पीढ़ियों के सशक्त भविष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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