आज 100 साल बाद रक्षाबंधन पर बना दुर्लभ संयोग, जानें राखी बांधने का मुहूर्त से लेकर हर एक जानकारी

आज रक्षाबंधन का पावन पर्व देशभर में मनाया जा रहा है। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व होता है और यह हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। रक्षाबंधन पर भद्राकाल का विशेष ध्यान दिया जाता है,लेकिन इस वर्ष न तो भद्राकाल का साया रहेगा और न ही पंचक का। हिंदू पंचांग के अनुसार आज रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए पूरे 7 घंटे और 37 मिनट का समय मिलेगा…

 

 

नईदिल्ली (ए)। आज पूरे देशभर में भाई-बहन के स्नेह और प्यार का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। आज के दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और आरती उतारकर भाईयों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है।

बहनें रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त पर भाईयों का आरती उतारती हुए राखी बांधती हैं, भाई इसके बदले में बहनों को उपहार देते हैं और उनकी हमेशा रक्षा करने का वचन देता है। इस बार रक्षाबंधन पर करीब 100 वर्षों पर इस तरह का संयोग बना हुआ कि रक्षाबंधन के दिन ना तो भद्रा का साया रहेगा और और ना ही पंचक का।

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी मानी जाती है। इस दिन रक्षाबंधन, यज्ञोपवीत संस्कार और ब्राह्मणों के उपाकर्म जैसे अनेक धार्मिक कार्य होते हैं।

इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहने के कारण आज सुबह से ही राखी बांधी जा सकती है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू हो गया है जो दोपहर को 01 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा शाम के समय भी राखी बांधी जा सकती है। लेकिन आज राहुकाल के दौरान राखी बांधने से बचना होगा।

राखी बांधने की सही दिशा: रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए और सिर को रुमाल से ढ़कना चाहिए। राखी भाई की दाहिने हाथ की कलाई में बांधना शुभ होता है।

आज रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया: आज देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। इस बार राखी पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में राखी पूरे दिन बांधी जा सकेगी। अगर शुभ मुहूर्त का विचार करें तो आज राखी बांधने के तीन शुभ मुहूर्त मिलेंगे। पहला मुहूर्त सुबह से लेकर 9 बजे तक।  दूसरा दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से लेकर 4 बजकर 30 मिनट तक। तीसरा शुभ मुहूर्त शाम 06 बजे से लेकर 7 बजकर 30 मिनट तक।

शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी तभी बांधनी चाहिए जब भद्राकाल न हो। भद्राकाल के दौरान किसी भी तरह का शुभ काम करना वर्जित होता है। भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। इस वर्ष रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया नहीं रहेगा।

95 साल बाद रक्षाबंधन पर बना दुर्लभ संयोग: रक्षाबंधन पर इस बार श्रावण नक्षत्र के साथ सौभाग्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है। रक्षाबंधन पर लगभग 95 वर्षों में एक बार होता है। आखिरी बार ऐसा संयोग 1930 के दशक में बना था। ऐसे में मेष, मिथुन और मीन राशि के जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है।
राखी बांधते समय इस मंत्र का करें जाप

ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

रक्षाबंधन 2025 पर चौघड़िया मुहूर्त

लाभ काल- प्रातः 10:15 से दोपहर 12:00 बजे
अमृत काल-दोपहर 1:30 से 3:00 बजे
चर काल- सायं 4:30 से 6:00 बजे

भाई को राशि के अनुसार बांधें राखी

मेष: लाल रंग की राखी

वृषभ: सफेद या सिल्वर रंग की राखी

मिथुन: हरे रंग या चंदन से बनी राखी

कर्क: सफेद रंग या मोतियों वाली राखी

सिंह: पीले, गुलाबी या सुनहरे रंग की राखी

कन्या: हरे या सफेद रेशमी राखी

तुला: आसमानी, सफेद या क्रीम रंग की राखी

वृश्चिक: गुलाबी या लाल रंग की राखी

धनु: पीले रंग या रेशमी राखी

मकर: नीले, सफेद या सिल्वर रंग की राखी

कुंभ: सिल्वर या पीले रंग की राखी

मीन: पीले रंग की राखी

भाई को इस रंग की न बांधे राखी: वैदिक शास्त्र के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई को काले रंग के धागे से बनी या काले रंग वाली राखी न बांधें। ज्योतिष शास्त्र में काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस रंग की राखी खरीदने या बांधने से बचना चाहिए।
राखी बांधने की सही विधि

रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों। स्वच्छ वस्त्र पहनें और सबसे पहले देवी-देवताओं की पूजा करके उन्हें भी रक्षा सूत्र अर्पित करें।

शुभ मुहूर्त में चांदी, पीतल या किसी अन्य धातु की थाली में रोली, चावल, सिंदूर, मिठाई, राखी और दीपक सजा लें। पहले भगवान का ध्यान करें, फिर भाई को एक चौकी या ऊंचे स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं और उसके सिर पर रूमाल या कपड़ा रख दें।

इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाए, फिर अक्षत लगाकर हल्के से ऊपर छिड़के और आरती उतारे। मंत्रोच्चार करते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें और मिठाई खिलाएं। भाई भी बहन को मिठाई खिलाकर उसके चरण स्पर्श करे, उपहार स्वरूप धन या कोई अन्य वस्तु भेंट करे और उसके सुखी व समृद्ध जीवन की कामना करे।

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